Sunday, April 17, 2016

औघड़प्रेम

हमारा प्यार सौंदर्यहीन प्यार का प्रचण्ड उदाहरण था. मैं अड़तालीस किलो का हुआ करता था और बेहद दुबला. वो सुन्दर तो बहुत थी लेकिन उसको पता ही नहीं था. मेरे अंदर कपड़ो के मैचिंग का कोई सेंस नहीं था और उसको अपने आप को अच्छा दिखने की परवाह नहीं थी . मैं कपड़ों से लिपटे बॉस सा पहुंच जाता था मिलने ..मेरे वजन के कम या ज्यादा होने का कोई खास फर्क नहीं था क्योंकि मिलने पर वैसे भी सब हवा हवा सा लगता था ..वो मिलने पर बहुत खुश हुआ करती थी और मैं उत्साहित, एक खास बात और थी ..जहाँ लड़के लड़कियों के लिए फूल ले के जाते थे या चॉकलेट लेके जाते थे मैं अमरुद लेके जाता था वो भी नारियल जैसा कच्चा और मीठा. उसको वही पसंद था ..वैसे तो हम लोग आईपी मॉल में भी मिलते थे और वहां आइसक्रीम भी खाते थे लेकिन इससे ज्यादा बार हम लोग पार्क में बैठ के चटनी  के साथ भुने हुए चने खाते थे. उसके पास फ़ोन नहीं था और मेरे तमाम कोशिशों के बावजूद वो लेने को तैयार नहीं थी ..हम जब मिलते तो बहुत दिनों की बाते गले में आके जमा हो गयी होती थी और फिर रास्ता न मिलने से कुछ जुबान और कुछ आँखों से बाहर आती थी. मुझे याद है कि वो रूमाल जो वो देती थी वो भी जेंट्स रुमाल हुआ करता था. धूप से बचने को छाता भी तुम बड़ा सा ब्लैक वाला लेके आती थी और मुझे भी उसी में चलने को बोलती थी ..बाकि लड़कियों जैसी एक आदत अच्छी थी कि गोलगप्पा और चाट तुमको भी पसंद थे
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#औघड़प्रेम